93 लाख का लोन स्वीकृत कराकर ठगी का आरोप
मोहद्दीपुर निवासी स्टेशन अधीक्षक मोहन सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि ध्रुव नारायण सिंह उनके रिश्तेदार हैं। उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी गरिमा लोगों के लोन माफ करा देती है। इस पर उन्होंने अपने पुराने लोन के संबंध में गरिमा से संपर्क किया। आरोप है कि गरिमा ने अलग-अलग बैंकों से उनके नाम पर 93 लाख 20 हजार रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया। इसके लिए उन्हें बैंक भी नहीं जाना पड़ा। गरिमा ने लोन की रकम में से आठ लाख रुपये छोड़कर बाकी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करा ली और एक साल में सभी ईएमआई खुद जमा करने का भरोसा दिया था।
टालमटोल करने पर खुला गिरोह का राज
आरोपी गरिमा द्वारा एक साल में सभी ईएमआई खुद जमा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन 14 महीने बीतने के बाद भी एक भी किस्त जमा नहीं हुई। जब मोहन सिंह ने रकम के बारे में पूछताछ की, तो वह टालमटोल करने लगी। इसके बाद पीड़ित को इस बड़े फर्जीवाड़े और गिरोह के बारे में सच्चाई पता चली, जिसके बाद उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और अन्य पीड़ितों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि धोखाधड़ी के इस साम्राज्य का पूरा पर्दाफाश हो सके।
दो आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस मुख्य आरोपी ध्रुव नारायण सिंह और उसकी बेटी गरिमा सिंह को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेज चुकी है। वहीं, शिक्षक दामाद भानू प्रताप सिंह, विशाल यादव, चंद्र प्रकाश, राजेंद्र कुमार और दिनकर मणि त्रिपाठी समेत अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। एम्स थाने में अब तक तीन प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं, जबकि एक मामला सहजनवां थाने में दर्ज है। इंस्पेक्टर महेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि अन्य छह शिकायतों की जांच की जा रही है और साक्ष्य मिलने पर उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।







